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Thursday, 21 July 2011

तारीख

निचले स्तर के न्यायालय है
मल के ढेरे मॅ
और हर न्याय का इच्छुक
है दुख के घेरे मॅ
जज है जो हर केस को
बुहार कोने मे करते
और गुहार लगाने वाले
है धीरे धीरे मरते
हर बैठी बैच के नीचे
दबा पाप है
यहाँ न्याय की गुहार लगाना
महा अभिशाप है
पन्ना पन्ना बनकर फाइल बनती है
बेन्च के नीचे दब कर पल पल गलती है
मिलती है तारीख मगर
हाय न्याय नही
फिर कोशिश करने पर
नई तारीख मिलती हैँ
इन पन्नो के बीच दबे
है गुनाह्गार जो
बन कर चूहे कीडे
अपनी राह करते हैँ
और कुछ न्याय के इन्तेज़ार मेँ
पल पल मरते हैँ
इन जजोँ से अच्छा मेरे घर
एक जमादार आता है
कूडा ले जाता ही है
रस्ता बुहार जाता है
इन न्याय के राजाओँ के
घर घर ऍलान कर दो
इनकी साँस भी दूभर कर दो
घर इनका कूडेदान कर दो
जमादार से कह दो
इनके घर ना जाए
जाए भी तो खाली हाथ 
अगली तारीख दे आए।

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